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डोनाल्ड ट्रंप के 26% टैरिफ बावजूद भारत को नहीं होगा नुकसान, मोदी को बताया अच्छा दोस्त

05:09 PM Apr 03, 2025 IST | Ashish bhardwaj
डोनाल्ड ट्रंप के 26  टैरिफ बावजूद भारत को नहीं होगा नुकसान  मोदी को बताया अच्छा दोस्त

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ‘टैरिफ वॉर’ के तहत दुनियाभर के कई देशों पर बुधवार, 2 अप्रैल (भारतीय समयानुसार 3 अप्रैल) को ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ यानी कि ‘जैसे को तैसा टैरिफ’ लगा दिया। ट्रंप ने 2 अप्रैल के दिन को अमेरिका के लिए आर्थिक आज़ादी का दिन बताते हुए भारत समेत कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लागू करने का ऐलान किया। ट्रंप ने घोषणा की कि 10% ‘बेसलाइन टैरिफ’ दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर लागू होगा और 5 अप्रैल को आधी रात 12:01 बजे से प्रभावी होगा। वहीं इससे ज़्यादा टैरिफ 9 अप्रैल को आधी रात 12:01 बजे से लागू होगा। ट्रंप ने भारत पर 26% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया है।

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पीएम मोदी को बताया अच्छा दोस्त
ट्रंप ने इस रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा करते हुए भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा दोस्त बताया। हालांकि ट्रंप ने यह भी साफ कर दिया कि भारत, अमेरिका पर 52% टैरिफ लगाता है और यह सही व्यवहार नहीं है। ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ से संबंधित अपने एक्ज़ीक्यूटिव ऑर्डर में 5 बार भारत की चर्चा की। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि दुनियाभर के सभी देश, अमेरिका से काफी ज़्यादा टैरिफ वसूलते हैं और इस वजह से अमेरिका को फिर से संपन्न बनाने के लिए टैरिफ बहुत ज़रूरी है।

भारत के पड़ोसी देशों पर लगाया ज़्यादा टैरिफ
अमेरिका ने भारत पर 26% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया है, लेकिन भारत के पड़ोसी देशों पर ज़्यादा टैरिफ लगाया है। ट्रंप ने चीन पर 34% टैरिफ, पाकिस्तान पर 29% टैरिफ, बांग्लादेश पर 37% टैरिफ, म्यांमार पर 44% टैरिफ, श्रीलंका पर 44% टैरिफ लगाया है।

भारत को नहीं होगा नुकसान
ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ से जहाँ दुनियाभर के देशों में चिंता पैदा हो गई है, भारत में इससे कुछ खास हलचल नहीं मची। रेसिप्रोकल टैरिफ के मामले पर देश के इकोनॉमिक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत को ट्रंप के इस फैसले से नुकसान नहीं होगा। पढ़कर मन में सवाल आना स्वाभाविक है कि ऐसा कैसे संभव है? दरअसल ट्रंप पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह इस मामले में उन देशों को राहत देंगे, जो अमेरिका को राहत देगा। ट्रंप ने पीएम मोदी के अमेरिका दौरे से पहले जब रेसिप्रोकल टैरिफ का ऐलान किया था, तब भारत के वाणिज्यिक मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया था कि वह इस विषय में ट्रंप प्रशासन से बातचीत के लिए तैयार है। भारत सरकार का इस मामले में रुख हमेशा से ही यह रहा है कि देशवासियों और बिज़नेस पर अमेरिकी टैरिफ का भार न पड़े। ऐसे में इसके लिए अगर ट्रंप प्रशासन से बातचीत भी करनी पड़े, तो भारत इससे पीछे नहीं हटेगा। इसके परिणामस्वरूप दूसरे देश जहाँ टैरिफ की वजह से होने वाले संभावित नुकसान के बारे में सोच रहे हैं, भारत निश्चिंत है कि उसे नुकसान नहीं होगा।

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