जयपुर बम ब्लास्ट के दौरान मिले जिंदा बम मामले में फैसला, 4 आरोपी दोषी घोषित, 8 अप्रैल को होगा सजा का ऐलान
करीब 17 साल पहले वर्ष 2008 में जयपुर में हुए सीरियल बम ब्लास्ट के दौरान चांदपोल के रामचंद्र मंदिर के पास मिले जिंदा बम मामले में जयपुर बम ब्लास्ट मामलों की विशेष अदालत ने आज फैसला सुना दिया है। जज रमेश कुमार जोशी ने जिंदा बम प्लांट करने के मामले में 4 आरोपियों को दोषी घोषित किया है। इनकी सजा का फैसला 8 अप्रैल को तय होगा, गौरतलब है बम ब्लास्ट के मामले में कुल 9 मुकदमे दर्ज हुए थे। ब्लास्ट के 8 मामलों में इसी अदालत ने करीब साढ़े 5 साल पहले आरोपियों को फांसी की सजा सुना चुकी हैं जिसे हाई कोर्ट ने बाद में सजा को रद्द करते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था, हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की अपील सुप्रीम कोर्ट में पेंडिग हैं।
इस मामले के 4 आरोपियों में से दो आरोपी जमानत पर तो दो आरोपी जेल में थे। आऱोपी सैफुर्रहमान और मोहम्मद सैफ जयपुर सेन्ट्रल जेल में बंद थे जिन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया। वहीं आरोपी मोहम्मद सरवर आजमी और आरोपी शाहबाज अहमद जमानत पर होने के चलते खुद ही अपने वकील के साथ कोर्ट में पेश हुए।
अदालत द्वारा दोषी घोषित करने के बाद जमानत पर रहे दोनों आरोपियों को भी हिरासत में लिया। कोर्ट ने चारों आरोपियों को बाद में जेल भेज दिया है।
जयपुर की चारदिवारी में 13 मई 2008 को 8 सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे। करीब 11 साल बाद 20 दिसम्बर 2019 को जयपुर बम ब्लास्ट की विशेष अदालत ने सैफुर्रहमान, मोहम्मद सैफ, मोहम्मद सरवर आजमी और एक अन्य नाबालिग (जिसे बाद में हाईकोर्ट ने घटना के समय नाबालिग माना) को फांसी की सजा सुनाई थी। वहीं, एक आरोपी शाहबाज अहमद को बरी कर दिया था।
इसके बाद एटीएस ने जिंदा बम मामले में इन सभी आरोपियों को 25 दिसम्बर 2019 को जेल से गिरफ्तार कर लिया। लेकिन हाई कोर्ट ने 29 मार्च 2023 को विशेष अदालत का फैसला पलटते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में जांच एजेंसियों की कमियों को भी उजागर किया था। एटीएस ने इस मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश की। जिसमें एटीएस ने तीन नए गवाह शामिल किए।
112 गवाह पेश
मामले में राज्य सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक सागर तिवारी और श्रवण कुमार ने पैरवी की,, सुनवाई के दौरान एटीएस ने पत्रकार प्रशांत टंडन, पूर्व एडीजी अरविंद कुमार और साईकिल कसने वाले दिनेश महावर सहित कुल 112 गवाहों के बयान दर्ज करवाए और 1200 से ज्यादा दस्तावेज पेश किए
आरोपियों की ओर से अधिवक्ता मिन्हाजुल हक ने बताया कि बचाव पक्ष की ओर से किसी भी गवाह के बयान दर्ज नहीं करवाए गए। उन्होने कहा कि इस मामले और पूर्व में ब्लास्ट के 8 मामलों के तथ्य समान हैं। इन्हीं समान तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट आरोपियों को बरी कर चुका हैं।
दोषी घोषित करने के बाद अब अदालत 8 अप्रैल को सजा का ऐलान करेगी