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किसके सिर सजेगा राजस्थान का ताज? वसुंधरा के अलावा CM की रेस में ये 3 चेहरे, चौंकाने वाला एक नाम!

शाही घराने से नाता रखने वाली वसुंधरा राजे बीजेपी की कद्दावर नेता है और पार्टी के अंदर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। हालांकि इस बार वो सीएम के दावेदार पार्टी की ओर से घोषित नहीं की गईं।
12:52 PM Dec 07, 2023 IST | Anil Prajapat
किसके सिर सजेगा राजस्थान का ताज  वसुंधरा के अलावा cm की रेस में ये 3 चेहरे  चौंकाने वाला एक नाम

Rajasthan CM: राजस्थान में मुख्यमंत्री के नाम को लेकर जयपुर से दिल्ली तक मीटिंगों का दौर जारी है। वहीं, अंदरखाने चर्चा है कि जैसे बीजेपी ने अन्य प्रदेशों में सीएम के चेहरे को लेकर चौंकाया है। क्या ऐसा ही चौंकाने वाला चिरपरिचित अंदाज राजस्थान में देखने को मिलेगा। फिलहाल, तस्वीर साफ नही है। लेकिन, यह तो साफ है कि वसुंधरा राजे तीसरी बार सीएम नहीं बनी तो बीजेपी के तीन बड़े चेहरे भी सीएम की रेस में बने हुए है।

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बता दें कि राजस्थान में विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने बंपर जीत हासिल की है। यहां पीएम मोदी के चेहरे पर विधानसभा चुनाव लड़ा गया और चुनाव से पहले सीएम का चेहरा घोषित नहीं किया गया। ऐसे में 199 सीटों में से बीजेपी के खाते में 115 सीटें आई हैं। लेकिन, अब तक बीजेपी सीएम के नाम का ऐलान नहीं कर सकी है। माना जा रहा है कि वसुंधरा राजे के साथ गजेंद्र सिंह शेखावत, अश्विनी वैष्णव और सीपी जोशी का नाम भी सीएम की रेस में बना हुआ है।

क्या तीसरी बार CM बनेंगी राजे?

शाही घराने से नाता रखने वाली वसुंधरा राजे बीजेपी की कद्दावर नेता है और पार्टी के अंदर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। हालांकि इस बार वो सीएम के दावेदार पार्टी की ओर से घोषित नहीं की गईं। ऐसे में इस शीर्ष पद के लिए इस बार वसुंधरा राजे समेत कई नाम आगे चल रहे हैं। भाजपा के संस्थापक नेता विजयराजे सिंधिया की बेटी और दिवंगत कांग्रेस नेता माधवराव सिंधिया की बहन, वसुंधरा राजे ने 1984 में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य, इसकी युवा शाखा के उपाध्यक्ष के रूप में अपना राजनीतिक करियर शुरू किया और धौलपुर से विधायक के रूप में चुनी गईं थी।

साल 2003 में जब राजस्थान में भाजपा की सरकार बनी तो वसुंधरा राजे राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी। इसके बाद साल 2013 में दोबारा राजस्थान की मुख्यमंत्री बनी थी। राजे तीन बार राज्य विधानसभा के लिए और पांच बार लोकसभा के लिए चुनी गईं और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में मंत्री भी रहीं। राजे ने झालरापाटन सीट से 53 हजार से अधिक मतों से जीत हासिल की है, ऐसे में वो सीएम की रेस में बनी हुई है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व के साथ उनके रिश्ते अच्छे नहीं चल रहे हैं।

रेस में शेखावत का भी नाम

जैसलमेर में 3 अक्टूबर 1967 को जन्मे गजेंद्र सिंह शेखावत वर्तमान में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री है। साल 2019 में गजेंद्र सिंह ने जोधपुर लोकसभा सीट से अशोक गहलोत के बेटे वैभव को हराकर सभी को चौंका दिया था और केंद्र में मंत्री बनाए गए थे। गजेंद्र सिंह शेखावत को वसुंधरा राजे का धुर विरोधी माना जाता है और वो पीएम मोदी के करीबी नेताओं में से एक है। क्योंकि वो लगातार गहलोत सरकार पर तीखे हमलों की बदौलत चर्चा में रहे है। उन पर गहलोत सरकार को गिराने की साजिश का भी आरोप लगा था। ऐसे में माना जा रहा है कि शेखावत को भी राजस्थान का सीएम बनाया जा सकता है।

रेल मंत्री को भी मिल सकती है कुर्सी!

मूलरूप से राजस्थान के रहने वाले रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी मुख्यमंत्री की रेस में बने हुए हैं। ब्यूरोक्रेट से राजनीति में आए अश्विनी वैष्णव अभी राज्यसभा सांसद हैं। वो केंद्रीय नेतृत्व के काफी करीब है और उनकी छवि भी साफ-सुथरी है। ब्राह्मण होने की वजह से बीजेपी वैष्णव को सीएम बना सकती है। अश्विनी वैष्णव 1994 बैच के ओडिशा कैडर के आईएएस अधिकारी रह चुके हैं। उन्होंने ओडिशा के बालासोर और कटक जिले के डीएम के तौर पर काम किया था।

तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय पीएमओ में उपसचिव नियुक्त किए गए थे। जब अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री कार्यालय छोड़ा तो अश्विनी वैष्णव ने उनके निजी सचिव की भूमिका निभाई थी। इस दौरान उनकी भाजपा नेताओं के साथ-साथ गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी से भी जान पहचान हो गई थी। वो बीजेपी के टिकट पर 28 जून 2019 में ओडिशा से राज्यसभा सदस्य चुने गए थे। इसके बाद पीएम मोदी ने 2021 में उन्हें कैबिनेट में जगह दी और रेलमंत्री बनाया था।

जोशी भी हैं पीएम मोदी के करीबी

चित्तौड़गढ़ से लोकसभा सांसद चंद्र प्रकाश जोशी के नेतृत्व में बीजेपी ने राजस्थान में प्रचंड जीत हासिल की है और वो केंद्रीय नेतृत्व के काफी करीब है। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी को प्रतिद्वंद्वी गुटों को साथ लाने और एकजुट अभियान तैयार करने का श्रेय दिया जाता है। यही वजह है कि चुनाव से पहले उदयपुर दौरे के दौरान पीएम मोदी भी उनके काम की सराहना कर चुके हैं। मेवाड़ क्षेत्र से नाता रखने वाले जोशी की संघ परिवार से अच्छे संबंध हैं और वो कम बोलने के लिए जाने जाते है। सीपी जोशी ऐतिहासिक अंतर के साथ लगातार दो बार सांसद बनने वाले इकलौते उम्मीदवार हैं।

वो पहली बार साल 2014 में सांसद चुने गए थे और 3 लाख 16 हजार 857 वोटों से जीत कर चित्तौड़गढ़ में एक रिकॉर्ड बनाया था। हालांकि, साल 2019 के लोकसभा चुनावों में चित्तौड़गढ़ सीट से बीजेपी सीपी जोशी ने फिर जीत हासिल कर खुद का ही रिकॉर्ड तोड़ दिया था। सीपी जोशी ने कांग्रेस के गोपालसिंह शेखावत ईडवा को 5 लाख 76 हजार 247 वोट से हराया था। इसके बाद सीपी जोशी को इसी साल मार्च में बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया था। इसके अलावा उनके पास प्रदेश में पार्टी के कई अहम पदों पर काम करने का अनुभव है। ऐसे में माना जा रहा है कि ब्राह्मण चेहरे को दिखते हुए बीजेपी 4 नवबंर 1975 को जन्मे सीपी जोशी पर दांव लगा सकती है और राजस्थान का सीएम बना सकती है।

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