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ना पद, ना तवज्जो...दिल्ली दरबार ने किया 'महारानी' को साइडलाइन! क्या है फिर बीजेपी का राजस्थान 'फॉर्मूला'

राजस्थान चुनावों के लिए बीजेपी की इलेक्शन मैनेजमेंट और मेनिफेस्टो कमेटी में वसुंधरा राजे का नाम नहीं है.
12:27 PM Aug 18, 2023 IST | Avdhesh
ना पद  ना तवज्जो   दिल्ली दरबार ने किया  महारानी  को साइडलाइन  क्या है फिर बीजेपी का राजस्थान  फॉर्मूला

Vasundhara Raje: राजस्थान में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होने से पहले सूबे के सियासी गलियारों में गहमागहमी तेज हो गई है जहां बीजेपी आलाकमान ने गुरुवार को चुनाव इलेक्शन मैनेजमेंट और मेनिफेस्टो कमेटी का गठन किया जहां किसी भी कमेटी में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का नाम नहीं होने से राजे चर्चा का केंद्र बन गई. राजे को किसी भी कमेटी में जगह नहीं मिलने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या वसुंधरा राजे को राजस्थान के चुनावों में सक्रिय तौर से दूर रखा जाएगा?

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वहीं कुछ जानकारों का कहना है कि वसुंधरा राजे की अनदेखी या उन्हें साइडलाइन करना बीजेपी के लिए मुश्किल भरा हो सकता है. हालांकि राजे की अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में बीजेपी के भीतरखाने मचा घमासान खुलकर बाहर भी आ सकता है.

इधर बताया जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान पांचों राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में किसी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाए बिना मैदान में उतरना चाहता है जहां बीजेपी मोदी के चेहरे और कमल के निशान पर जनता के बीच जाएगी. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या राजस्थान में वसुंधरा राजे को दरकिनार कर दिया गया है? क्या बीजेपी किस अन्य फॉर्मूले पर राजस्थान में चुनाव लड़ना चाह रही है?

चेहरा और काम बीजेपी की रणनीति

दरअसल राजस्थान चुनाव को लेकर खुद पीएम मोदी पिछले कुछ महीनों में 6 बार दौरा कर चुके हैं जिसके बाद बताया जा रहा है कि बीजेपी पीएम मोदी के चेहरे और काम पर चुनावी मैदान में उतरने का मन बना चुकी है. हालांकि हिमाचल और कर्नाटक चुनावों में मोदी फैक्टर के चलते बीजेपी को नुकसान हुआ था जिसके बाद राजस्थान में सामूहिक नेतृत्व के साथ बीजेपी चुनावी मैदान में उतर सकती है.

जहां बीते दिनों सीपी जोशी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया और लगातार बन रही कमेटियों में प्रदेश के नेताओं को समायोजित किया जा रहा है. वहीं इससे पहले बीजेपी नेता कई बार यह संदेश दे चुके हैं कि राजस्थान में कोई चुनावी चेहरा नहीं होगा और सब मिलकर ही चुनाव लड़ेंगे.

राजे के लिए बाकी है उम्मीद!

वहीं चुनावों में राजे की भूमिका को लेकर पार्टी के प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह ने कहा कि बाकी सभी वरिष्ठ नेता प्रचार करेंगे और पार्टी के कई कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारी दी जाती है और आगे भी सबको जिम्मेदारी दी जाएगी. जानकारों का कहना है कि बीजेपी राज्य में चुनावों को लेकर अभी एक प्रचार प्रसार समिति बनाएगी जिसमें अब राजे का नाम आने की अटकलें लगाई जा रही है.

इधर हाल में वसुंधरा राजे ने दिल्ली आकर पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और वह पार्टी मुख्यालय में बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष से भी मिली. वहीं राजे ने बीते दिनों देवदर्शन यात्रा और सभाओं के जरिए अपना शक्ति प्रदर्शन किया था लेकिन उनका ये दांव नहीं चला. मालूम हो कि राजस्थान की सियासत में गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल और सतीश पूनिया राजे के धुर विरोधी माने जाते हैं.

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