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वीरांगनाओं को जबरन गाड़ी में बिठाती रही पुलिस, मां के पीछे- पीछे घूमता रहा छोटा बच्चा... CM आवास के पास दिखा 'दयनीय' नजारा

03:59 PM Mar 04, 2023 IST | Jyoti sharma

जयपुर। पुलवामा अटैक के शहीदों की वीरांगनाऐं पिछले 5 दिनों से शहीद स्मारक पर मांगों को लेकर धरने पर बैठी हैं और आज जब वह किरोड़ी लाल मीणा के साथ राजभवन ज्ञापन देने गई तो मुख्यमंत्री आवास की तरफ भी जाने की कोशिश करने लगीं लेकिन वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। इस पर वीरांगना जबरन अंदर जाने की कोशिश करने लगी तो पुलिस धक्का-मुक्की पर उतर आई। कथित तौर पर पुलिस ने मारपीट भी की जिसमें शहीद रोहिताश की पत्नी और वीरांगना मंजू जाट घायल हो गई। उन्हें SMS अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज जारी है।

मां के पीछे पीछे घूमता रहा छोटा बच्चा

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो किरोड़ी लाल मीणा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। जिसमें साफ देखा जा सकता है कि मंजू मंजू जाट समेत सभी वीरांगनाऐं अपने बच्चों के साथ मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने की कोशिश करती हैं लेकिन वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी उन्हें रोक देते हैं। इस पर मंजू जाट जबरन सड़क पर बैठ जाती हैं। उन्हें उठाने के लिए महिला पुलिसकर्मी आती हैं लेकिन वे उठने को तैयार नहीं होती।

इस पर पुलिस ने उनसे जबरदस्ती की जिसमें धक्का-मुक्की भी हुई। आरोप है कि कथित तौर पर पुलिस ने मारपीट भी की। इस पूरे घटनाक्रम में एक चीज पर गौर करें तो देखेंगे कि वीरांगनाओं के साथ आए उनके बच्चे इस पूरी राजनीति का शिकार हो रहे हैं।

इधर पुलिस जबरन वीरांगनाओं को गाड़ी में बैठाने की कोशिश करती है तो साथ में ही एक वीरांगना का बच्चा अपनी मां के पीछे पीछे घूमता रहता है कि उसकी मां को जबरन उठाकर कहां ले जाया जा रहा है। बच्चा रोता हुआ भी दिखाई दे रहा है।

किरोड़ी ने पूछा, क्या सीएम से मिलना गुनाह है?

इस वीडियो को ट्वीट करते हुए किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि आज तीनों वीरांगनाओं के साथ राज्यपाल कलराज मिश्र को ज्ञापन देने राजभवन गया था। ज्ञापन सौंपने के बाद वीरांगनाएं मुख्यमंत्री से मिलने के लिए मुख्यमंत्री आवास की ओर पहुँची तो पुलिस ने उनके साथ अभद्रता व मारपीट की। इसमें पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए रोहिताश्व लांबा की पत्नी वीरांगना मंजू जाट घायल हो गईं। उन्हें एसएमएस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

धूप, बरसात में बैठी है वीरांगनाऐं लेकिन किसी को चिंता नहीं

क्या वीरांगनाओं का प्रदेश के मुखिया से मिलने के लिए उनके सरकारी आवास की ओर जाना गुनाह है, जो पुलिस ने उनके साथ अभद्रता व मारपीट की? मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले 3 अमर शहीदों की वीरांगनाएँ धूप,बरसात में धरने पर बैठे हुए 5 दिन हो गए हैं, लेकिन अभी तक इनकी जायज मांगें पूरी नहीं हुई हैं।

ये और कुछ नहीं, बल्कि शहादत के समय मंत्रियों की ओर से की गई घोषणाओं को ही पूरा करने की मांग कर रही हैं।पता नहीं सरकार किस उधेड़बुन में वीरांगनाओं की मांगों को पूरा करने का रास्ता क्यों नहीं तलाश पा रही है? मेरा सीएम अशोक गहलोत से आग्रह है कि वे इस मामले में वे स्वयं संज्ञान लें और वीरांगनाओं की मांगों की शीघ्र पूरा करने का निर्देश प्रदान करेंI

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