शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि आज, कैसे मिली छत्रपति की उपाधि
मराठा साम्राज्य की स्थापना करने वाले वीर योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज की आज पुण्यतिथि है। छत्रपति शिवाजी महाराज मराठा सम्राट थे। इतिहास के पन्नों में शिवाजी महाराज की शौर्यगाथा सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। उनकी वीरता की मिसाल महाराष्ट्र में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में दी जाती है। जब भी छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम लिया जाता है, हर कोई गर्व और ऊर्जा को महसूस करता है। शिवाजी महाराज की जन्म 19 फरवरी 1630 में हुआ था। उन्होंने मुगलों को परास्त कर मराठा साम्राज्य को बुलंद किया। वहीं 3 अप्रैल 1680 को उनका निधन हो गया। आज ही के दिन गंभीर बीमारी के कारण शिवाजी महाराज ने पहाड़ी दुर्ग राजगढ़ में अपने प्राण त्याग दिए।
15 साल की उम्र में किया मुगलों पर हमला
छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म शाहजी भोसले और माता जीजाबाई के घर पर 19 फरवरी 1630 में हुआ था। उनके जन्म के समय भारत मुगल आक्रमणकारियों से घिरा हुआ था। मुगल सल्तनत ने दिल्ली समेत पूरे भारत पर कब्जा कर लिया था। जब हिंदुओं पर संकट आन पड़ी तो शिवाजी महाराज ने महज 15 वर्ष की आयु में हिंदू साम्राज्य को स्थापित करने के लिए पहला आक्रमण किया।
गोरिल्ला युद्ध में पारंगत थे शिवाजी महाराज
मुगलों को धूल चटाने के लिए शिवाजी ने बीजापुर पर हमला कर दिया। वह युद्ध में कुशल रणनीति तैयार करने में सक्षम थे और गोरिल्ला युद्ध पारंगत थे। इसी कौशल से शिवाजी ने बीजापुर के शासक आदिलशाह को मौत के घाट उतार दिया।
धोखे से औरंगजेब ने बनाया था बंदी
शिवाजी ने बीजापुर के चार किलों पर कब्जा कर लिया था। शिवाजी महाराज की वीरता और पराक्रम के किस्से बढ़ने लगे तो औरंगजेब डर गया। उसने छल से संधि वार्तालाप के लिए शिवाजी को आगरा बुलाया और उन्हें बंदी बना लिया। हालांकि शिवाजी उनके कब्जे में अधिक दिन न रहे और फल की टोकरी में बैठकर मुगलों के बंदीगृह से भाग निकले। उसके बाद उन्होंने मुगल सल्तनत के खिलाफ जंग छेड़ दी।
1674 में छत्रपति की उपाधि हासिल हुई
शिवाजी को मुगलों के साथ ही मराठाओं से भी कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बीजापुर की आदिलशाही, अहमदनगर की निजामशाही और औरंगजेब की मुगलिया सल्तनत की शक्तिशाली विशाल सेनाओं को उन्होंने कई बार नाकों चने चबवाए थे। उन्हें 1674 में छत्रपति की उपाधि हासिल हुई
थी।
3 अप्रैल 1680 को 50 साल की उम्र में निधन
शिवाजी महाराज की मृत्य 3 अप्रैल 1680 को हुई थी, उस समय वह 50 साल के थे। उनकी मौत के कारण को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है। कुछ का कहना है कि उनकी स्वाभाविक मृत्यु हुई थी, जबकि कई किताबों में लिखा गया है कि उन्हें साजिश के तहत जहर देकर मारा गया था। कहा जाता है कि जहर की वजह से उन्हें खून की पेचिस होने लगी थी, जिसे ठीक नहीं किया जा सका। दावा यह भी किया जाता है कि शिवाजी तीन साल से बीमार चल रहे थे।