For the best experience, open
https://m.sachbedhadak.com
on your mobile browser.

नाबालिग से रेप-मॉब लिंचिंग पर फांसी, राजद्रोह कानून खत्म...3 नए क्रिमिनल लॉ से क्या-क्या बदलेगा?

11:38 AM Dec 21, 2023 IST | Sanjay Raiswal
नाबालिग से रेप मॉब लिंचिंग पर फांसी  राजद्रोह कानून खत्म   3 नए क्रिमिनल लॉ से क्या क्या बदलेगा

Criminal Law Bills: संसद के शीतकालीन शत्र के दौरान बुधवार (20 दिसंबर) को आपराधिक कानून संशोधन से जुड़े तीन नए बिल लोकसभा से पास हो गए हैं। अब इन्हें राज्यसभा में रखा जाएगा। वहां से पास होने के बाद इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। इससे पहले बुधवार को इन बिलों पर चर्चा हुई। केंद्रीय गृह मंत्री ने इन बिलों को पेश करते हुए कहा-नए कानून में आतंकवाद, महिला विरोधी अपराध, देश द्रोह और मॉब लिंचिंग से संबधित नए प्रावधान है।

Advertisement

नए बिल को लेकर लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि मोदी सरकार ने अंग्रेजों के जमाने के राजद्रोह कानून को खत्म कर दिया है। नाबालिग से रेप और मॉब लिंचिंग जैसे क्राइम में फांसी की सजा दी जाएगी। बता दें कि ये तीनों बिल ऐसे समय में पास हुए हैं, जब संसद के 143 सांसदों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें से 97 सासंद लोक सभा के हैं, जबकि 46 राज्य सभा के हैं।

देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर जेल

बिल पर लोकसभा में गृहमंत्री ने कहा कि अंग्रेजों का बनाया राजद्रोह की जगह उसे देशद्रोह कर दिया है। क्योंकि अब देश आजाद हो चुका है, लोकतांत्रिक देश में सरकार की आलोचना कोई भी कर सकता है। अगर कोई देश की सुरक्षा, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का काम करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

इस बिल के अनुसार, अगर कोई सशस्त्र विरोध करता है, बम धमाके करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी, उसे आजाद रहने का हक नहीं, उसे जेल जाना ही पड़ेगा। कुछ लोग इसे अपनी समझ के कपड़े पहनाने की कोशिश करेंगे, लेकिन मैंने जो कहा उसे अच्छी तरह समझ लीजिए। देश का विरोध करने वाले को जेल जाना होगा।

यह खबर भी पढ़ें :- लोकसभा में 3 नए आपराधिक कानून बिल पारित, अमित शाह बोले- PM मोदी मिटा रहे गुलामी के निशान

बच्ची से रेप के दोषी को फांसी की सजा

पहले रेप की धारा 375, 376 थी, अब जहां से अपराधों की बात शुरू होती है, उसमें धारा 63, 69 में रेप को रखा गया है। गैंगरेप को भी आगे रखा गया है। बच्चों के खिलाफ अपराध को भी आगे लाया गया है। मर्डर 302 था, अब 101 हुआ है। 18 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप में आजीवन कारावास और मौत की सजा का प्रावधान है। गैंगरेप के दोषी को 20 साल तक की सजा या जिंदा रहने तक जेल का प्रावधान है।

गैर इरादतन हत्या को कैटेगिरी में बांटा

प्रस्तावित कानून में गैर इरादतन हत्या को दो हिस्सों में बांटा गया है। अगर गाड़ी चलाते वक्त हादसा होता है, फिर आरोपी अगर घायल को पुलिस स्टेशन या अस्पताल ले जाता है तो उसे कम सजा दी जाएगी। हिट एंड रन केस में 10 साल की सजा मिलेगी।

वहीं मॉब लिंचिंग में फांसी की सजा होगी। स्नैचिंग के लिए कानून नहीं था, अब कानून बन गया है। किसी के सिर पर लाठी मारने वाले को सजा तो मिलेगी, इससे ब्रेन डेड की स्थिति में आरोपी को 10 साल की सजा मिलेगी।

पुलिस की जवाबदेही भी तय होगी

अमित शाह ने कहा कि नए कानून में अब पुलिस की भी जवाबदेही भी तय होगी। अब कोई गिरफ्तार होगा तो पुलिस उसके परिवार को जानकारी देगी। पहले यह जरूरी नहीं था। किसी भी केस में 90 दिनों में क्या हुआ, इसकी जानकारी पुलिस पीड़ित को देगी।

आरोपी की गैरमौजूदगी में भी ट्रायल होगा

देश में कई केस लंबित पड़े हैं, बॉम्बे ब्लास्ट जैसे केसों के आरोपी पाकिस्तान जैसे देशों में छिपे हैं। अब उनके यहां आने की जरूरत नहीं है। अगर वे 90 दिनों के भीतर कोर्ट के सामने पेश नहीं होते हैं तो उसकी गैरमौजूदगी में ट्रायल होगा।

यह खबर भी पढ़ें :- क्या सच में खतरनाक है कोरोना का नया वेरिएंट JN.1? WHO का इस पर क्या है कहना, पढ़िए

आधी सजा काटने पर मिल सकती है रिहाई

गंभीर मामलों में आधी सजा काटने के बाद रिहाई मिल सकती है। जजमेंट सालों तक नहीं लटकाया जा सकता। मुकदमा समाप्त होने के बाद जज को 43 दिन में फैसला देना होगा। निर्णय देने के 7 दिन के भीतर सजा सुनानी होगी। पहले सालों तक दया याचिकाएं दाखिल की जाती थीं।

दया की याचिका दोषी ही कर सकता है पहले एनजीओ या कोई संस्थान ऐसी याचिकाएं दाखिल करता था। सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद 30 दिन के भीतर ही दया याचिका दाखिल की जा सकेगी। जो देश की एकता, अखंडता, सुरक्षा को खतरे में डालकर भय फैलाने का काम करता है, उसे आतंकवादी माना जाएगा।

3 विधेयकों से क्या बदलाव होगा

3 विधेयकों से कई धाराएं और प्रावधान बदल जाएंगे। IPC में 511 धाराएं हैं, अब 356 बचेंगी। 175 धाराएं बदलेंगी। 8 नई जोड़ी जाएंगी, 22 धाराएं खत्म होंगी।

इसी तरह CrPC में 533 धाराएं बचेंगी। 160 धाराएं बदलेंगी, 9 नई जुड़ेंगी, 9 खत्म होंगी। पूछताछ से ट्रायल तक वीडियो कॉन्फ्रेंस से करने का प्रावधान होगा, जो पहले नहीं था।

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ट्रायल कोर्ट को हर फैसला अधिकतम 3 साल में देना होगा। देश में 5 करोड़ केस पेंडिंग हैं। इनमें से 4.44 करोड़ केस ट्रायल कोर्ट में हैं।

इसी तरह जिला अदालतों में जजों के 25,042 पदों में से 5,850 पद खाली हैं।

भारतीय न्याय संहिता में हुए ये बड़े बदलाव

भारतीय न्याय संहिता (BNS) में 20 नए अपराध जोड़े गए हैं।

ऑर्गेनाइज्ड क्राइम, हिट एंड रन, मॉब लिंचिंग पर सजा का प्रावधान।

डॉक्यूमेंट में इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड शामिल हैं।

IPC में मौजूद 19 प्रावधानों को हटा दिया गया है।

33 अपराधों में कारावास की सजा बढ़ा दी गई है।

83 अपराधों में जुर्माने की सजा बढ़ा दी गई है।

छह अपराधों में सामुदायिक सेवा की सजा का प्रावधान किया गया है।

.