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Gyanvapai Masjid Verdict : कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने लिया ये बड़ा फैसला, जानें इस केस में अब तक क्या-क्या हुआ

03:34 PM Sep 12, 2022 IST | Jyoti sharma
gyanvapai masjid verdict   कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने लिया ये बड़ा फैसला  जानें इस केस में अब तक क्या क्या हुआ

Gyanvapi Masjid Verdict : बहुचर्चित ज्ञानवापी मस्जिद पर फैसला आ गया है। ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी मंदिर मामले में वाराणसी निचली अदालत का फैसला आ गया है, कोर्ट ने यह फैसला हिंदुओं के पक्ष में सुनाया है, यानी श्रृंगार गौरी मामले को कोर्ट में सुनवाई होगी। इसका मतलब पूरे ज्ञानवापी मामले को कोर्ट में सुना जाएगा। अब कोर्ट 22 सितंबर को इस मामले की अगली सुनवाई करेगा। फैसले के वक्त वाराणसी कोर्ट में सभी पक्ष-विपक्ष के लोग मौजूद रहे।

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वहीं अब मुस्लिम पक्ष ने इस मामले (Gyanvapi Masjid Verdict) को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। मुस्लिम पक्ष अब इस केस को लेकर हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा। मुस्लिम पक्ष के मौलाना खालिद राशिद ने कहा है कि हम इसे लेकर लीगल एक्शन लेंगे। 1991 के वरशिप एक्ट के तहत इस मामले को हाइकोर्ट में लेकर जाएंगे। हम सैकड़ों साल से यहां नमाज अदा कर रहे हैं। इसे ऐसे ही नहीं जाने देंगे।

श्रृंगार गौरी के मंदिर पर विवाद

बता दें कि ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid Verdict) को मुस्लिम पक्ष बाबर के जमाने के वक्त की मस्जिद बताता है, मुस्लिम पक्ष इसे वक्फ की संपत्ति बताता है, तो हिंदु पक्ष का मानना है कि ज्ञानवापी परिसर भगवान शिव का मंदिर है, यहां पर स्थित श्रृंगार गौरी मंदिर तक का पूरा क्षेत्रफल ज्ञानवापी मंदिर के अंतर्गत आता है। हिंदू पक्ष का कहना है कि इस पूरे क्षेत्र को मंदिर पक्ष को सौंप देना चाहिए जिससे यहां पर भगवान विश्वेश्वर यानी भगवान शिव की पूजा-अराधना हो सके।

क्या है पूरा विवाद                                                                   

काशी विश्वनाथ और ज्ञानवापी (Gyanvapi Masjid Verdict) का यह विवाद कई सालों पुराना है लेकिन औपचारिक रूप से इसने विवाद का रूप पिछले ,साल अगस्त में लिया, जब दिल्ली की रहने वाली राखी सिंह समेत 4 महिलाओं ने वाराणसी की निचली अदालत में दरअसल यह विवाद शुरू होता है एक याचिका से, जिसमें इन महिलाओं ने मस्जिद परिसर में पूजा-अर्चना करने की अनुमति मांगी थी। इस याचिका में दावा किया गया था कि ज्ञानवापी एक मस्जिद नहीं बल्कि काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर का एक हिस्सा है, इस याचिका का सबसे मजबूत हिस्सा यह था कि काशी विश्वनाथ मंदिर कते गर्भगृह की सीध में जहां मस्जिद का प्रवेश द्वार है वहां पर नंदी की प्रतिमा होना और प्रतिमा का दाईं तरफ माता श्रृंगार गौरी का मंदिर होना। याचिकार्ताओं का कहना है कि इस कथित मस्जिद परिसर में श्रृंगार गौरी मंदिर के अलावा हनुमान जी, भगवान गणेश, आदि विश्वेश्वर यानी भगवान शिव औऱ कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थित हैं जो किसी मस्जिद में तो नहीं होती जिससे साबित होता है कि यह मस्जिद नहीं मंदिर है और यहां पर जबरन कब्जा किया गया है।

जांच में वजूखाने में शिवलिंग जैसी आकृति मिलने का दावा

वाराणसी निचली अदालत में दाखिल इस याचिका पर सुनवाई के बाद इसकी जांच के आदेश दिए गए थे। जिसके बाद पूरे परिसर की वीडियोग्राफी करवाई गई थी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने इसकी जांच की थी जो कि अभी भी चल रही है। बीते महीनों में टीम ने वीडियोग्राफी के कुछ अंश पब्लिक किए थे, जिसमें मस्जिद (Gyanvapi Masjid Verdict) के वजूखाने का हिस्सा भी दिखाया गया था जो एक बड़े विवाद की वजह बना था। दजरअसल इस वीडियो में वजूखाने तके बीचोंबीच एक शिवलिंग जैसी दिखने वाली आक्ति दिखाई गई थी। जिसे हिंदू पक्ष के लोगों ने शिवलिंग की संज्ञा दी है, तो वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि ये शिवलिंग नहीं बल्कि एक फव्वारा है जो अब तकनीकी समस्या के कारण बंद करा दिया गया है। हालांकि ASI की टीम ने इसकी पूरी एक रिपोर्ट तैयार की थी जिसके बाद इसे निचली अदालत में पेश किया गया था, कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए वजूखाने वाली जगह को सील करा करने का आदेश दे दिया और उसे जांच की हिस्सा करार दिया।

मुस्लिम पक्ष का क्या कहना है

दूसरी तरफ मुस्लिम पक्ष (Gyanvapi Masjid Verdict) इस दावे को पूरी तरह खारिज कर रहा है।  मुस्लिम पक्ष के वकील अभय यादव का कहना है कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में श्रृंगार गौरी मंदिर की बात से वे इनकार नहीं कर रहे हैं, लेकिन वह प्रतिमा मस्जिद की पश्चिमी दीवार से बाहर है इसका मतलब यह हुआ कि मंदिर मस्जिद परिसर में न होकर बाहर है। तो फिर क्यों इस मंदिर को मस्जिद परिसर में बताया जा रहा है और इस पर सर्वे की क्या जरूरत है। उनका यह भी कहना है कि कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के कोई आदेश नहीं दिए हैं।

काशी विश्वनाथ में ही है श्रृंगार गौरी का मंदिर!

बीते मई महीने में जब सर्वे टीम को जांच के आदेश दिए गए थे तब इस मामले ने बेहद सुर्खियां बटोरी थीं। दरअसल मस्जिद के अंदर जांच के लिए टीम का जाना बेहद मुश्किल हो गया था। क्योंकि मुस्लिम पक्ष जांच को लेकर अपने तर्कों से पीछे नहीं हट रहा था, उनका कहना था कि अगर श्रृंगार गौरी का मंदिर मस्जिद (Gyanvapi Masjid Verdict) परिसर में है तो प्रतिमा को काशी विश्वनाथ मंदिर की दीवार के अगल-बगल वाली प्रतिमाओं की सर्वे होना चाहिए न कि मस्जिद के अंदर आकर इसकी जांच करनी चाहिए। मुस्लिम पक्ष का यह भी कहना है कि याचिका में जिस जगह को (श्रृंगार गौरी और अन्य देवी-देवताओं के मंदिर ) ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर का बताया जा रहा है इसके कोई भी प्रमाण यानी मैप वगैरह भी कोर्ट में पेश नहीं किया गया है, न ही इसकी प्लॉटिंग के बारे में कुछ भी प्रमाण दिया गया है।

क्या है पुराना विवाद

ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Masjid Verdict) को लेकर विवाद 1991 से गर्माया हुआ है। इस साल मस्जिद के अस्तत्व को लेकर एक केस दर्ज हुआ था। इसमें दावा किया गया था कि यह मस्जिद काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में बनी है, पहले यहां कई मंदिर औरल देवी-देवताओं की प्रतिमा हुआ करती थीं, लेकिन मुगल शासक औरंगजेब ने इन मंदिरों को तुड़वाकर यहां पर मस्जिद तान दी गई। हिंदु पक्ष के लोगों ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया यानी ASI से भी जांच कराने की मांग की थी। जिसके बाद यह सर्वे हुआ भी जिसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश भी की जा चुकी है। लेकिन 9 नवंबर 2021 को इलाहाबाद हाइकोर्ट ने ASI के ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वेक्षण पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद 20 मई 2022 को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में इस मामले को वाराणसी की निचली अदालत को सौंप दिया गया था। जिसके बाद इस मामले की आज वाराणसी की अदालत में सुनवाई हुई कि श्रृंगार गौरी केस सुनवाई के लायक है या नहीं जिसमें अदालत का फैसला हिंदू पक्ष में सुनाया गया।

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